Monday, October 18, 2021

ASHQ BAHTE HAIN TO ...

Ashq bahte hain to bah Jaane de zara
Aankhein namm hona bhi jaroori hain

Khud ko aise na takleef de itni
Gham ko tu apne mujhe de zara

Aa ja simat ja bahon me meri
Tere liye hi main aaya yaha

Tujhko mera chahe na ho pata
Par mujhme to har dum tu hi raha

Tere bin ye zindagi meri adhoori hain
Ashq bahte hain to....

Has de zara tu, aa khilkhila
Mere paas tu aa ya mujhe paas bula

Kahne ko yaha hain sab hi apne
Main tera apna hu, aa aazmaa..

Tu meri zameen hain meri hi h tu
Gale se laga le, hu main aasaman

Aa jaa naa saiyyan kya mazboori hain
Ashq bahte hain to.....

Saturday, October 27, 2018

Aasan Si Baatein

आसान सी बातें कहने को भी लफ्ज़ भारी चाहिए
लोहे को लोहे नहीं काटता साहब,  धारदार आरी चाहिए।

ये जो  भी  कहते फिरते हैं कि ग़मो के अँधेरे हैं  बहुत
उनसे ये पूछता हूँ कि और कितनी दिवाली चाहिए।।

उसने कहा मेरे मज़हब में नहीं हैं किसी और का बुरा करना
अरे मज़हब किसी और का भी कुछ जुदा नहीं होता।

जो  तुमको  सिखाए  मेरे अज़ीज़ अश्क़ बाँटना
वो खुदा कसम कभी कोई खुदा नहीं होता।।

अरे महसूस करने को तो बस एक ख़्याल काफी हैं
वो खुद ही उठा देता हैं  बस एक सव्वाली चाहिए।

लाज़िम हैं चाँदनी ये हर रोज नहीं लगता
उससे पहले अमावस की एक रात काली चाहिए।।

मेरी बातें पढ़ के लोग मुझसे नफरत करने लगे हैं
मुझे खुद से ज़रा सी अब तो थोड़ी वाहवाही चाहिए।

दिल को जला जला के राख कर दिया
इस राख को मंदिर की धूल बनाने वाली चाहिए।।








Friday, September 16, 2016

मैं जा भले रहा हूँ तेरा शहर छोड़ कर

मैं जा भले रहा हूँ तेरा शहर छोड़ कर
पर यकीन कर तुझे अपने साथ हैं ले जाना

जब भी दिल करे मिलने का मुझसे
आंखे बंद न करना बस मेरा नाम लबों पे आना

मैं भी तुझे अपने साथ हर पल रखूँगा
मेरी मुस्कान याद करके तू भी मुस्कुराना

प्यार कभी कम न होगा तेरा ये जानता हूँ
तू दूरियों में भी विश्वास ये मुझपे जताना

न लड़ना न झगड़ना ना मुझसे ज़रा भी रूठना
बस शिकायत हो गर कभी तो मुझसे खुल कर बताना

मैं तोडूंगा नहीं कोई वादा ओ दिलबर
ना किसी कसम को मैंने हैं भूल जाना

तू भी आ जाना उस शहर कुछ वक़्त के बाद
मेरे पास न सही, मेरे साथ ज़िन्दगी ज़िन्दगी बिताना

सब कुछ छोड़ न सको तो कोई बात नहीं
मुझे न छोड़ देना बस प्यार मुझसे निभाना

कि हमदम  तुझसे जुदा मैं हो नहीं सकता
ये बात बस अपने ज़ेहन में ऐसे बिठाना

कि जब भी कोई संदेह हो मुझपे
थोड़ा प्यार बढ़ के मुझे और अपना बनाना।।।।

मुझे भूल जा

मैं पल हूँ एक या एक सदा
तू याद कर या भूल जा

मुझको फ़र्क पड़ता नहीं
ना तुझसे ही बस रिश्ता मेरा

मैं हूँ तो तू भी हैं यहाँ
मेरे बिन तेरा क्या हैं निशान

तू हैं नहीं कुछ भी नहीं
बिन आसमाँ जैसे ज़मीं

हाँ लगे भला या लगे बुरा
मुझको हैं क्या मुझको हैं क्या

मैं खुश नहीं तो तेरी खता
तू खुश नहीं तो मत जता

तुझसे मेरा जीवन जो था
खुद ही तूने हाँ मिटा दिया

बस अब नहीं हाँ अब नहीं
हो चुका बहुत जो भी हुआ

तुझसे रखूँ मैं क्यों वास्ता
तुझसे मुझे मिलता हैं क्या

बस अजनबी हाँ अज़नबी
बन के रहेंगे हम यहाँ

मैंने सही तेरी हर एक अदा
शिकवा भी कब कोई किया

तू जो खिलखिला के हँसी कभी
मैंने अपने ग़म को छुपा लिया

रोई जो  कभी मुझे कर के याद
पल भर में तुझको हँसा दिया

अब कह भी दूँ तो होगा क्या
मैं कैसे तुझको दूं सजा

मेरा दिल ही मेरा साथी न हुआ
किसी और की गलती है क्या

जा माफ़ तुझको कर दिया
मुझे भूल जा मुझे भूल जा

अब बस रहम करना इतना
कि न देखूं कभी चेहरा तेरा

मैं पल हूँ एक या एक सदा
तू याद कर या भूल जा......


Tuesday, September 13, 2016

मौत से मोहलत

इतने अरसे बाद कुछ कलम ने हरकत की हैं
कि बहुत से भी ज्यादा इस दिल ने हसरत की हैं

पाने को किसी को बेताब इतना रहा हैं
कि सांसो को गिनने की इसने हिम्मत की हैं

ख़ुदा का सजदा किया हैं बंद खुली आँखों से
नींदों से दगा करने की क्या खूब जुर्रत की हैं

तुझे लगता हैं कि ये दीवाना बस ऐसे ही मर जायेगा
याद रख न भूलना कि मैंने सच्ची मोहब्बत की हैं !!

बस थोड़ी दूर हुआ हु तुझसे नहीं शहर से तेरे
तेरी तो हर पल मैंने लाख इबादत की हैं

लिखना पड़ेगा रब्ब को तुझे मेरी तक़्दीरों में
कुछ तो असर लाएगी जो इतनी मिन्नत की हैं

डरना नहीं कभी जो देख ले कोई साया तू
ज़िंदा हूँ तब तक जब तक तुझसे मिल न पाउँगा

मैंने कसम से यार मेरे यकीन कर
साँसों को रोक रखा हैं और मौत से मोहलत ली हैं !!!

Wednesday, March 2, 2016

AJEEB GALATFAHMI

अज़ीब ही एक ग़लतफ़हमी हैं मेरी शख्शियत
कि मैं खुद को बेहद सुलझा हुआ पाता रहा

खुद लगा ना पाया अंदाज़ा-ए-सलाहियत
कि हर काम ऐसे ना-गुंजाईश किये जाता रहा!!

भूलता रहा बड़ा होते होते मैं अपनी तरबियत
कि गलतियाँ कर कर के बस उनको छिपाता रहा

छुपी रहे जहाँ  भर से मेरी असलियत
कि नक़ाब पे नक़ाब बेहिसाब चढ़ाता रहा

बनाये रखने को अपनी नज़रो में अपनी अहमियत
कि तन्हाई में यारों "बैर" खुद से निभाता रहा

नासाज़ ना हो ये बे-फ़िज़ूल जो मेरी हैं तबियत
कि हर हाल में बेपरवाह "मान" मुस्कुराता रहा!!

Monday, January 4, 2016

Main Chahta Kuch Nahi

मैं चाहता कुछ  नहीं
हाँ सच कुछ भी नहीं

तेरा साथ नहीं पल पल का
हर पल तुझसे बात भी नहीं

ना चाहता हूँ दिन गुज़रे तुझ संग
कोई हसीन रात भी नहीं

मैं तुझसे कुछ मांगू भी कैसे
मांग सकने की भी तो औकात नहीं

बस याद कर मुझको थोड़ा
बस प्यार कर थोड़ा ही सही

सोच कभी मेरे बारे में
कोई ख्वाब देख मेरा कभी

खुद को खुश रख कुछ पल तू
ओ हमदम कर एहसान यहीं

दूर रह भले मुझसे
पास आने को तड़प तो सही

मिलने को ना आ भले कभी
मिलने को कहा कर,  हैं बहुत यहीं

विश्वास रख मुझपे इतना
कि टूट न पाये हो जाये कुछ भी

मुस्कुरा खिलखिला गुनगुना ऐसे
जैसे तुझ पे कोई ग़म ही नहीं

मेरे नाम से संभल जाये दिल
मेरे नाम पे रख इतना यकीन

मैं चाहता कुछ नहीं
हा सच कुछ भी नहीं। .... !!!!!!!

Tuesday, September 8, 2015

संतान से सुख मिल नहीं सकता, माँ बाप को जो कभी दिया ही नही

बहुत रोज से कुछ लिख रहा था मैं
ना जाने क्यूँ अधूरा सा लग रहा था वही

लगता हैं जो मेरें  हर पल साथ हैं
उसी को ज़रूरी मैं लग रहा था नहीं

मै  भीड़ में उसको खुद से जोड़ के
चल पड़ता था सब कुछ छोड़ के

आसान करने को उसका हर एक सफर
बेपरवाह  हर मुश्किल तोड़ के

वो काबिल हुआ हैं इतना कि यारों
अब लगता हैं उसको मेरी  चाहत  ही नही

मेरे  खून के कतरे को मेरी कसम
पल भर को मेरी जरूरत ही नहीं

मैं अपने पिता को याद करू
कि अपनी नापाक अदाओ को

मैं बुरा हुआ इतना भी क्यूँ
कि हक़ मिला ऐसी सजाओ को

 अपने को सही मान कर मैंने
शायद न कोई गलती थी की

पर गलत उनके साथ किया
 हा वो मेरी बदसलूकी ही थी

जो कहना चाहूँ वो कह भी पाउ
ये मुझ को मुश्किल लगता हैं

बेमतलब सा अब मुझको
ये सारा जीवन लगता हैं

हा जो भी कहा वो गर समझो
अपनों को पूरा मान दो

ज्यादा कुछ इसमें लगता ही नहीं
बस माता पिता को सम्मान दो

प्यार से बढ़कर कोई तोहफा
कभी किसी को मिला ही नहीं

संतान से सुख मिल नहीं सकता
माँ बाप को जो कभी दिया ही नही.......... !!!!










Monday, March 16, 2015

Aaj Fir likh raha hoon

आज फिर लिख रहा हूँ मैं दास्ताँ कोई  पुरानी
झीलों की नगरी में थी एक अजब दीवानी

थोड़ी अलग थी थोड़ी सबके जैसी
कैसी थी तुम जानो मेरी जबानी

अंदाज़ अदाएं ढंग थे ज़ुदा
जुदा थी उसकी हर एक निशानी

मस्त रहकर जीना था सीखा
हर बात थी अपने दिल की मानी

सबके दिलो पे राज़ था उसका
तरीके थे उसके इतने रूमानी

अब बात करे कहानी की अगर
था एक राजा जिसकी थी वो रानी

सुन्दर गठीला बदन था सुगढ़
शहर में ना था उसका कोई सानी

नवाबों से कम न था उसका रुबाब
हर सुंदरी लिए खड़ी थी अपनी जवानी

उसपे फ़िदा हो के उसके ख्वाबों में
खोने लगी वो गुम होने लगी

रातें की काली दिन लाल किये
खुद अपने में वो कम होने लगी

एक दिन मिला मौका  मिलन का उनसे
बस सच करने को सपने  बाट जोहने लगी

इतवार का दिन था अनाथों से मिलने
वो आये उनकी मुरादें पूरी करने

अनाथों का एक ही सहारा था वो
कश्तियों का उनकी किनारा था वो

सीखा था उसने यही अपने पिता से
देने से मिलता हैं सब कुछ यहाँ

बातो को उनकी ही मानता रहा वो
जो कहा उन्होंने किया बस वो

उस रोज़ वो भी विचरण के बहाने
पहुंची वहाँ  दरकिनार कर के  दीवाने

कोशिश की हज़ार कि हो आमना सामना
पर लगा न कहीं उसका कोई निशाना

वो अपने बच्चो में खुश था बहुत
खोया था उनकी मुस्कुराहटों में

वो गुज़री उनके निकट से कई बार
पर न असर था कोई उसकी आहटों में

आखिर हुआ वही जिसके लिए ये कहानी लिखनी पड़ी मुझको
मिले नैन, हुए एक, प्रेम बंधन की कड़ी लगने लगी उनको

बस इतना मान लो कि इसी बात की देरी थी
फिर वो सब चीज़े जल्दी हुई  जो बेहद ज़रूरी थी

ख़ास सी लगने लगी आम सी उनकी ज़िन्दगी
हर बात हर चीज़ प्यारी हो गयी जब हुई इश्क़ की बंदगी

हर समां हर मंज़र हर पल खुशनुमा हुआ
ऐसा दिलकश एहसास पहले कब और कहाँ हुआ

वक़्त गुज़रा दिन महीने साल हुए
हर पल साथ रहने की तड़प में अब दोनों बेहाल हुए

चाहत होने लगी अब पल पल संग जीने की
हसने की संग रोने की हरदम खुश रहने की

पर कहते हैं हासिल मुक्कम्मल जहाँ नहीं मिलता
किसी को ज़मीन किसी को आसमान नहीं मिलता

प्रेम के बंधन टूटतेनहीं ये बात जानता ज़माना हैं
पर तोड़ दिए जाते हैं न इससे भी बेगाना हैं

अक्सर बेटी विदा होने पे अश्क बहाती जाती हैं
अपनों को छोड़ गैरो के संग जब घर बसाने जाती हैं

पर उसको रोना आया तो बस अपनी बेवफाई पे
शादी जो की अपनो को बचाने को जग-हसाईं से

न ये अंत हैं मेरी इस कहानी का न कोई शुरुआत हैं
बस इतना समझलो ये मेरे देश के हालत हैं

ऐसे ही हंसती खेलती बिटिया जब अपनों के लिए इतना कर देती  हैं
तो क्या अपने कुछ करे उस की ख़ुशी के लिए न इतनी सी औकात हैं

अपील नहीं न गुज़ारिश हैं न उम्मीद न आपसे कोई
कि ये सब बदलेगा और प्रेम पनपेगा कभी

बस सोचता हूँ तो लगता हैं बुरा कि कैसे जीने को मज़बूर हैं हम
मंज़ूर मौत अपनों की हैं ये कैसे मगरूर हैं हम

हाँ मैं अपने बच्चो को इतनी सी ख़ुशी ज़रूर दूंगा
की जीवन अपना वो खुद जिए और ख़ुशी मैं उनको ला दूंगा !!!!!!!!

Tuesday, March 11, 2014

Gurroor

तुझे नाज़ है अगर अपनी अदाओ पे इतना
तो सुन ये काफी नहीं मुझे रिझाने के लिए

नहीं कोई आफताब जो जल उठूँ शबाब देखकर
साँसों में आग लगनी होगी मुझे जलाने के लिए

भूल कर सब कुछ खुद से होकर ज़ुदा
मुझमे मिलना होगा मुझे पाने के लिए

इज़हार करना होगा पल पल चाहतो का
दिल्लगी करनी होगी दिल लगाने के लिए। … 

Monday, March 11, 2013

Kyu rokte ho khud ko mujh me mil jane se

क्यों रोकते हो खुद को मुझमे मिल जाने से
सब जहाँ मिल जायेंगे बस तेरे मेरे मिल जाने से
कि ख़त्म हो जाएँगी बाकी ख्वाहिशें
मेरी सुबह में तेरी खुशबू घुल जाने से

शाम और दोपहर मेरी महकने लगेंगी
धडकनें  तेरे नाम से बहकने लगेगी
तेरी मंज़ूरी हो जाये ऐ दिलबर तो सच
बरसों से गुम मुस्कान फिर चहकने लगेंगी

मैं खो जाऊंगा फिर तेरे प्रेम के भंवर में
कि याद ना रहेंगी कोई सांझ तेरी सेहर में
हाँ व्यस्त कर लूँगा खुद को तेरी मुस्कान के लिए इतना
ना याद रहेगा कोई सिवा तेरे इस सुनसान शहर में

मैं कहता हूँ जो सच है और यही हकीकत हैं
आज मुझे गर हैं तो बस तेरी ज़रुरत हैं
खुदा की बंदगी भी तुझे पाने को ही  शुरू की
दिल-ए-"मान" के लिए तू ही बस उसकी इबादत हैं

दिल कहता हैं हर लम्हे में तारीफ करूं तेरी
उसमे भी हासिल पर मुझे कहा महारत हैं
हो पायेगा जीना तो अब तेरे साथ ही
बिन तेरे चलती इन साँसों पे लानत हैं

अब तू कबूल कर ले तोहफे मोहब्बत के
कि बता मुकाम कोई तो मेरी चाहत के
किसी ओर तरह पाना होता तो कब का पा चुका होता
कि इनाम कोई तो नाम कर मेरी शराफत के

हाँ ये हो ना पता मुमकिन शायद कभी भी
जो आखिर तेरी पहल पे हमने कही तो सही
जो तू ना समझ पाता मेरे इश्क की ख़ामोशी
तो "मान" कह ना पाता ये दिल की बात कभी

और हाँ जो बोल पाया हूँ तो इनकार मत करना
हाँ भले तू खुल के इज़हार मत करना
बेकरार दिल में अभी तो चैन आया हैं
चुप रहना भले पर नामंज़ूर मेरा प्यार मत करना

नहीं कहता ये कि बिन तेरे मर जाऊंगा
पर इतना तो तय हैं कि जी भी ना पाउँगा
हाँ तुझसे ओ हसीं दूरियाँ बढ़ा लूँगा
इस तेरे दिल से खुद को मिटा दूंगा________

My Conversation with Loneliness

Today loneliness came to me and asked
“Where were you from the last 5 days?”
"I waited for you
I searched everywhere for you
I asked all the persons in path
In all the drawings and in all the bays."

"I went to river and asked to her
Have you seen my dearest one?"
"I approached the sky and asked him too
If he has seen a face like you"
"I wondered everywhere
And jumped from terrace to terrace"


"And after all my trials of finding you
I got to know that I can’t find you"
"You were nowhere in this world
But were flying like the happiest bird"

"Because you were gifted with such a friend
Who hasn’t left you alone for a single moment"
"The one was always caring for you
And that turned my worries from red to blue"

"Now I agreed with the words of her
That those five days were the happiest ever
But again you found me you're very clever
Now I’ll be with you from now forever…. "

My Good Luck that I met you

It was my good luck that I met you
God has given me that beautiful chance
I was always a pen without Ink
But really got refilled after having your glance…

It is the most valuable moment for me
That you and your feelings are with me
I’ll never give u a chance to go
And the feel between us will forever grow…

I wish you too love this stupid man
So that I can say that my destiny is the best
From the day I’ve seen your face
Life has become a beautiful fest

I have composed these lines for just a reason
That for proposing my love there need not be any season
And at last I am saying to you
In three most lovely words “I Love You”

Thursday, March 7, 2013

Himmat

अब तक जो हमने पाया वो हक की बात थी
गर वो ना मिल सका तो लानत की बात थी

या ख़ुदा जब भी सोचा तो सोचा बस उन्हें
एक बार भूलना भी तो हिम्मत की बात थी

ना अभी का हैं जूनून ना आज की हैं बात
सदियों से गुम दिलो के मिलने की बात थी

हो जाये गर मेहरबां वो आज "मान" पर
तो ये समझना कि ज़िन्दगी भी कल की बात थी________!!!

Izhaar

 इज़हार ना कर सके पर हम ये सोचते थे कि जिन्हें खुद इश्क की पनाह हो
इज़हार-ए-इश्क की उनको कभी ज़रुरत नहीं होती

ग़मो के दौर में जिनके साया रहते हैं हम
ख़ुशी के पलो में उनको हमारी ही हसरत नहीं होती

ना जाते उस रोज़ जन्नत न मिलती उनसे नज़रे
या ख़ुदा उनके दीदार की फिर हमे चाहत नहीं होती

मासूम दिलकश अदाओं पे हम बन गए दीवाने
सोचा था यहाँ कभी बनावट नहीं होती

ख्वाबों से बसते थे "मान" कभी जिनके आशियाँ
सुना हैं आज कल वह कोई सजावट नहीं होती

जो उसने ठान ली मुझसे रूठ जाने की
तो दिल पे किसी के किसी और की हुकूमत नहीं होती

दुआ हैं उस परवरदिगार से तेरी सलामती की
कि दिल तोड़ने वालों को हासिल कभी जन्नत नहीं होती________!!!

Rutba

ये ज़मीन की फितरत है की वो हर चीज़  जब्त कर लेती हैं
वरना तेरी  याद में निकले आंसुओ का एक अलग समुन्दर होता

हर बार चुप रहे ज़ख्म बनते भरते गए
जो तुम साथ होते तो मैं भी खुल कर रोता

मुहब्बत ना करता, दिल्लगी ना होती
जो नज़रे वार ना करती, तो ये दिल भी ना खंजर होता

दिल ने कहा था जो कुछ गर उसपे गौर करता
तो आज मेरे रुतबे का कुछ और मंज़र होता

वो अकेले चले गए आवाज़ भी ना दी हमको
क्यों ना समझे ख़ुशी का लम्हा तो साथ चलकर होता

मस्जिद की सीढ़ी चड़ी ना मंदिर में माथा टेका
जो तेरा नूर आता तो ये पाक जिगर होता

"मान" तुम पर भी होता गर खुद कभी मेहरबान
तो शायद ये ज़माना न इतना सितमगर होता

अब आज सोचते हैं क्यों कह ना पाए उनसे
जो उनके साथ होता तो पल-पल ये सुन्दर होता_________!!!

Virodh

कभी धूप घनी स्वर्णिम कभी अजब काली छाया
मैं खुद को आज तक क्यों समझ नहीं पाया

अथाह दुःख में गोते, अपार हर्ष भी आया
कभी दे दिया बहुत कुछ, कभी रस्ते से लेकर आया

कभी खोने की सीमा न रही, कभी अत्यंत वैभव पाया
कभी भीड़ का नेतृत्व, कभी खुद को ना संभाल पाया

कभी हँसते हँसते रोया, रोने पे हँसना आया
कई ज़िंदगियाँ बनादी, कभी खुद को ना जीना आया

विश्वास के प्रजाल में विराट धोखा खाया
अगाध प्रेम की लहर से मन-पग को धोकर आया

सफलता मिली अपार कभी, कभी असफल लौट के आया
फिर सूरज की किरणों को मन में उतार लाया

पर हर बार मन की चंचलता को गौर से देखा तो पाया
कि मैं खुद को आज तक क्यों समझ नहीं पाया ______!!!

Kaash Main Bhi Manav Hota

दुखी होता हूँ सोचकर
खुद में कमियाँ  देखकर
कितना बुरा हु मैं जानता हूँ मैं
सभी गलतियाँ अपनी मानता हूँ मैं
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता


मेरी अच्छाईयां छिप जाती हैं
मेरे गुण सिमट जाते हैं
बढ़ जाती हैं बेचैनियाँ ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता


दुर्गुणों का विकास हो रहा
गुणों का मेरे ह़ास हो रहा
मंजिल पहले खुद चलती थी
अब मुकाम से दूर हो रहा
मन करता हैं विद्रोह बहुत अब ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता



मनुष्यता मेरी नष्ट हो रही
दैन्यता हष्ट पुष्ट हो रही
'लक्ष्य' की ओर बढ़ते हैं कदम
पर दक्षता कम हो रही
रहकर जीवित भी मर न जाऊं ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता


क्षमताओ का विनाश हो रहा
लालसाओ का विस्तार हो रहा
चरित्र के उत्थान में प्रयासरत हैं हम
पर पतन के गर्त में वह गिर रहा
परमात्मा से दूर हो न जाऊं ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता_____________!!!

Ek Bhayawah Kalpana

२१ वी सदी में आते आते किया भारत ने भी विकास
नगर बढ़ गए गाँव घाट गए पर बढ़ न सके आवास

समस्या थी विचित्र कोई हल नहीं था
फिर भी शान्ति थी मन में कोई भय नहीं था

"काटिए वृक्ष" इस पर दिया संपूर्ण बल
यही था लगा इस विचित्र समस्या का हल

फिर मानव ने काटे वृक्ष और दिया धरा को उजाड़
तब रोकने इस घटना को थी आई मरू में बाढ़

ऐसी विपदा आ सकती है फिर, अब तुम इससे बचना
विपदाओं से दूर रखेगी तुम्हे "एक भयावह कल्पना"

Wednesday, March 6, 2013

Various 5

TERE HAR LAMHE KI KHABAR CHAHIYE
TERI NAZRO ME MERI NAZAR CHAHIYE
KOI BANDISH NAHI TUJHPE DILNASHI
BAS PYAR ME ITNA ASAR CHAHIYE…

Main  jo bhi kahta hu wo alfaz tere ho
Mujhe jo bhi mile wo ehsaas tere ho
Main kuch isse zyada chahu nahi re ab
Bas jo mere aas paas ho wo geet aur saaz tere ho…

Thik tera mera rishta bhi ajab hai yaar
Main sab kuch chhod du, tu chhote na yaar
Kya kashish hai na jane kya junoon hai
Tod diya har nata fir kyu toote na pyar…

Sach ab dil karta hai kisi ko na manau
Jo rooth gaye hai sab to main bhi rooth jau
Mujhe akele jeene ka shouk tha kab se
Jo aaj mouka mila hai to yaar kaise gawau…

Jo kuch tune kaha gar tere dil me bhi wahi hota
Mujhe malum gar ye chalta to main hi nahi hota
Tujhe pata hai tera deewana tarasta hai tere sath ko
Chhod,  khabar ye tujhko hoti to tu mere sath yahin hota…

Aaj tere ishq ka imtehaan hoga
Mehfil nahi fir sada soona makan hoga
Ki aaj tera paigam jo na mila mujhko
To faasla fir umra bhar apne darmiyan hoga…

Paas mere tere ehsaas hai dilbar
Bas tujhse doori ka ehsaas satata hai
Har baat manzoor hai tere ‘Maan’ ko dilbar
Bas tujhse itni doori sah nahi pata hai…!!!