ये ज़मीन की फितरत है की वो हर चीज़ जब्त कर लेती हैं
वरना तेरी याद में निकले आंसुओ का एक अलग समुन्दर होता
हर बार चुप रहे ज़ख्म बनते भरते गए
जो तुम साथ होते तो मैं भी खुल कर रोता
मुहब्बत ना करता, दिल्लगी ना होती
जो नज़रे वार ना करती, तो ये दिल भी ना खंजर होता
दिल ने कहा था जो कुछ गर उसपे गौर करता
तो आज मेरे रुतबे का कुछ और मंज़र होता
वो अकेले चले गए आवाज़ भी ना दी हमको
क्यों ना समझे ख़ुशी का लम्हा तो साथ चलकर होता
मस्जिद की सीढ़ी चड़ी ना मंदिर में माथा टेका
जो तेरा नूर आता तो ये पाक जिगर होता
"मान" तुम पर भी होता गर खुद कभी मेहरबान
तो शायद ये ज़माना न इतना सितमगर होता
अब आज सोचते हैं क्यों कह ना पाए उनसे
जो उनके साथ होता तो पल-पल ये सुन्दर होता_________!!!
वरना तेरी याद में निकले आंसुओ का एक अलग समुन्दर होता
हर बार चुप रहे ज़ख्म बनते भरते गए
जो तुम साथ होते तो मैं भी खुल कर रोता
मुहब्बत ना करता, दिल्लगी ना होती
जो नज़रे वार ना करती, तो ये दिल भी ना खंजर होता
दिल ने कहा था जो कुछ गर उसपे गौर करता
तो आज मेरे रुतबे का कुछ और मंज़र होता
वो अकेले चले गए आवाज़ भी ना दी हमको
क्यों ना समझे ख़ुशी का लम्हा तो साथ चलकर होता
मस्जिद की सीढ़ी चड़ी ना मंदिर में माथा टेका
जो तेरा नूर आता तो ये पाक जिगर होता
"मान" तुम पर भी होता गर खुद कभी मेहरबान
तो शायद ये ज़माना न इतना सितमगर होता
अब आज सोचते हैं क्यों कह ना पाए उनसे
जो उनके साथ होता तो पल-पल ये सुन्दर होता_________!!!
No comments:
Post a Comment