Thursday, March 7, 2013

Ek Bhayawah Kalpana

२१ वी सदी में आते आते किया भारत ने भी विकास
नगर बढ़ गए गाँव घाट गए पर बढ़ न सके आवास

समस्या थी विचित्र कोई हल नहीं था
फिर भी शान्ति थी मन में कोई भय नहीं था

"काटिए वृक्ष" इस पर दिया संपूर्ण बल
यही था लगा इस विचित्र समस्या का हल

फिर मानव ने काटे वृक्ष और दिया धरा को उजाड़
तब रोकने इस घटना को थी आई मरू में बाढ़

ऐसी विपदा आ सकती है फिर, अब तुम इससे बचना
विपदाओं से दूर रखेगी तुम्हे "एक भयावह कल्पना"

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