Tuesday, September 13, 2016

मौत से मोहलत

इतने अरसे बाद कुछ कलम ने हरकत की हैं
कि बहुत से भी ज्यादा इस दिल ने हसरत की हैं

पाने को किसी को बेताब इतना रहा हैं
कि सांसो को गिनने की इसने हिम्मत की हैं

ख़ुदा का सजदा किया हैं बंद खुली आँखों से
नींदों से दगा करने की क्या खूब जुर्रत की हैं

तुझे लगता हैं कि ये दीवाना बस ऐसे ही मर जायेगा
याद रख न भूलना कि मैंने सच्ची मोहब्बत की हैं !!

बस थोड़ी दूर हुआ हु तुझसे नहीं शहर से तेरे
तेरी तो हर पल मैंने लाख इबादत की हैं

लिखना पड़ेगा रब्ब को तुझे मेरी तक़्दीरों में
कुछ तो असर लाएगी जो इतनी मिन्नत की हैं

डरना नहीं कभी जो देख ले कोई साया तू
ज़िंदा हूँ तब तक जब तक तुझसे मिल न पाउँगा

मैंने कसम से यार मेरे यकीन कर
साँसों को रोक रखा हैं और मौत से मोहलत ली हैं !!!

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