Thursday, March 7, 2013

Kaash Main Bhi Manav Hota

दुखी होता हूँ सोचकर
खुद में कमियाँ  देखकर
कितना बुरा हु मैं जानता हूँ मैं
सभी गलतियाँ अपनी मानता हूँ मैं
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता


मेरी अच्छाईयां छिप जाती हैं
मेरे गुण सिमट जाते हैं
बढ़ जाती हैं बेचैनियाँ ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता


दुर्गुणों का विकास हो रहा
गुणों का मेरे ह़ास हो रहा
मंजिल पहले खुद चलती थी
अब मुकाम से दूर हो रहा
मन करता हैं विद्रोह बहुत अब ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता



मनुष्यता मेरी नष्ट हो रही
दैन्यता हष्ट पुष्ट हो रही
'लक्ष्य' की ओर बढ़ते हैं कदम
पर दक्षता कम हो रही
रहकर जीवित भी मर न जाऊं ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता


क्षमताओ का विनाश हो रहा
लालसाओ का विस्तार हो रहा
चरित्र के उत्थान में प्रयासरत हैं हम
पर पतन के गर्त में वह गिर रहा
परमात्मा से दूर हो न जाऊं ये सब जानकर
पर इस बात से सिर्फ मन ही दुखी होता
काश! मैं भी मानव होता_____________!!!

No comments:

Post a Comment