Friday, September 16, 2016

मुझे भूल जा

मैं पल हूँ एक या एक सदा
तू याद कर या भूल जा

मुझको फ़र्क पड़ता नहीं
ना तुझसे ही बस रिश्ता मेरा

मैं हूँ तो तू भी हैं यहाँ
मेरे बिन तेरा क्या हैं निशान

तू हैं नहीं कुछ भी नहीं
बिन आसमाँ जैसे ज़मीं

हाँ लगे भला या लगे बुरा
मुझको हैं क्या मुझको हैं क्या

मैं खुश नहीं तो तेरी खता
तू खुश नहीं तो मत जता

तुझसे मेरा जीवन जो था
खुद ही तूने हाँ मिटा दिया

बस अब नहीं हाँ अब नहीं
हो चुका बहुत जो भी हुआ

तुझसे रखूँ मैं क्यों वास्ता
तुझसे मुझे मिलता हैं क्या

बस अजनबी हाँ अज़नबी
बन के रहेंगे हम यहाँ

मैंने सही तेरी हर एक अदा
शिकवा भी कब कोई किया

तू जो खिलखिला के हँसी कभी
मैंने अपने ग़म को छुपा लिया

रोई जो  कभी मुझे कर के याद
पल भर में तुझको हँसा दिया

अब कह भी दूँ तो होगा क्या
मैं कैसे तुझको दूं सजा

मेरा दिल ही मेरा साथी न हुआ
किसी और की गलती है क्या

जा माफ़ तुझको कर दिया
मुझे भूल जा मुझे भूल जा

अब बस रहम करना इतना
कि न देखूं कभी चेहरा तेरा

मैं पल हूँ एक या एक सदा
तू याद कर या भूल जा......


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