श्वेत पत्र पर लिख दिया इजहार हमने इश्क का
वो दिल से पढ़े जो एक बार तो न न कह सकेंगे
और मिल जाये अगर वो हमको कही किसी मोड़ पर
तो कहता हूँ सच कशिश वो होगी की फिर मेरे बिन न रह सकेंगे
सोचेंगे मुझे ही हर शाम हर सुबह
पर हया की बदोलत किसी से न कह सकेंगे
की वादे करने को दिल करेगा उनका मुझसे
पर मेरी सदाए जो मिलेगी वो वादे कर न सकेंगे..
चाहते रहेंगे हर लम्हा हर घडी मुझे
पर बात यही होगी की कभी न मिल सकेंगे
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