Sunday, April 22, 2012

Preet

जान तुमपे आज एक गीत लिख रहा हूँ
दिल में तेरे जानम मेरी प्रीत लिख रहा हूँ

जिस दिन से मिले हो खुदा की कसम
दुनिया से जुदा नयी रीत लिख रहा हूँ

दिल मेरा गुमराह हो न जाये कही कभी
इसलिए मंजिले तेरी ही सुबह शाम लिख रहा हूँ

गर जो हो यकीन मेरी मोहब्बत पे
तो दिल से पढना मैं जो भी लिख रहा हूँ

चाहत है बस तुम्हारे लिए दिल में
तुमको ही अपना जीवन मीत लिख रहा हूँ


जान तुमपे आज एक गीत लिख रहा हूँ.....

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