ऐसा नहीं की तुझे पाने की आरज़ू नहीं रखता
पर ज़माने की दहलीजो से परे मैं कदम नहीं रखता
हाँ तुझे पाना तो कभी मेरा मकसद था ही नहीं
पर तू किसी और की हो जाये ये ख्वाहिश नहीं रखता
तेरे साथ मुझे तो बस कुछ यादिएँ बनानी थी
इससे बढ़कर अब कोई हसरत नहीं रखता
"श्रेयस" की आदत है दिल में दाखिल होना
पर दिल से चले जाने का हुनर नहीं रखता............!!!!!!!
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