Sunday, April 22, 2012
Preet
जान तुमपे आज एक गीत लिख रहा हूँ
दिल में तेरे जानम मेरी प्रीत लिख रहा हूँ
जिस दिन से मिले हो खुदा की कसम
दुनिया से जुदा नयी रीत लिख रहा हूँ
दिल मेरा गुमराह हो न जाये कही कभी
इसलिए मंजिले तेरी ही सुबह शाम लिख रहा हूँ
गर जो हो यकीन मेरी मोहब्बत पे
तो दिल से पढना मैं जो भी लिख रहा हूँ
चाहत है बस तुम्हारे लिए दिल में
तुमको ही अपना जीवन मीत लिख रहा हूँ
जान तुमपे आज एक गीत लिख रहा हूँ.....
Saturday, April 21, 2012
Saath
खामोश राहो में तेरा साथ चाहिए
तनहा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए
मुझको मेरे मुक़द्दर पर इतना यकीन तो है
तुझको भी मेरे लफ्ज़ मेरी बात चाहिए
मैं खुद अपनी शायरी को क्या अच्छा कहु
मुझको तेरी तारीफ तेरी दाद चाहिए
मोहब्बत का एहसास सिर्फ तेरे लिए है लेकिन
इश्क के जूनून को तेरी सौगात चाहिए
तू मुझको पाने की ख्वाहिश रखता है लेकिन
मुझको तो जीने के लिए बस एक मुलाक़ात चाहिए..........!!!!!!
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