Wednesday, March 2, 2016

AJEEB GALATFAHMI

अज़ीब ही एक ग़लतफ़हमी हैं मेरी शख्शियत
कि मैं खुद को बेहद सुलझा हुआ पाता रहा

खुद लगा ना पाया अंदाज़ा-ए-सलाहियत
कि हर काम ऐसे ना-गुंजाईश किये जाता रहा!!

भूलता रहा बड़ा होते होते मैं अपनी तरबियत
कि गलतियाँ कर कर के बस उनको छिपाता रहा

छुपी रहे जहाँ  भर से मेरी असलियत
कि नक़ाब पे नक़ाब बेहिसाब चढ़ाता रहा

बनाये रखने को अपनी नज़रो में अपनी अहमियत
कि तन्हाई में यारों "बैर" खुद से निभाता रहा

नासाज़ ना हो ये बे-फ़िज़ूल जो मेरी हैं तबियत
कि हर हाल में बेपरवाह "मान" मुस्कुराता रहा!!

Monday, January 4, 2016

Main Chahta Kuch Nahi

मैं चाहता कुछ  नहीं
हाँ सच कुछ भी नहीं

तेरा साथ नहीं पल पल का
हर पल तुझसे बात भी नहीं

ना चाहता हूँ दिन गुज़रे तुझ संग
कोई हसीन रात भी नहीं

मैं तुझसे कुछ मांगू भी कैसे
मांग सकने की भी तो औकात नहीं

बस याद कर मुझको थोड़ा
बस प्यार कर थोड़ा ही सही

सोच कभी मेरे बारे में
कोई ख्वाब देख मेरा कभी

खुद को खुश रख कुछ पल तू
ओ हमदम कर एहसान यहीं

दूर रह भले मुझसे
पास आने को तड़प तो सही

मिलने को ना आ भले कभी
मिलने को कहा कर,  हैं बहुत यहीं

विश्वास रख मुझपे इतना
कि टूट न पाये हो जाये कुछ भी

मुस्कुरा खिलखिला गुनगुना ऐसे
जैसे तुझ पे कोई ग़म ही नहीं

मेरे नाम से संभल जाये दिल
मेरे नाम पे रख इतना यकीन

मैं चाहता कुछ नहीं
हा सच कुछ भी नहीं। .... !!!!!!!

Tuesday, September 8, 2015

संतान से सुख मिल नहीं सकता, माँ बाप को जो कभी दिया ही नही

बहुत रोज से कुछ लिख रहा था मैं
ना जाने क्यूँ अधूरा सा लग रहा था वही

लगता हैं जो मेरें  हर पल साथ हैं
उसी को ज़रूरी मैं लग रहा था नहीं

मै  भीड़ में उसको खुद से जोड़ के
चल पड़ता था सब कुछ छोड़ के

आसान करने को उसका हर एक सफर
बेपरवाह  हर मुश्किल तोड़ के

वो काबिल हुआ हैं इतना कि यारों
अब लगता हैं उसको मेरी  चाहत  ही नही

मेरे  खून के कतरे को मेरी कसम
पल भर को मेरी जरूरत ही नहीं

मैं अपने पिता को याद करू
कि अपनी नापाक अदाओ को

मैं बुरा हुआ इतना भी क्यूँ
कि हक़ मिला ऐसी सजाओ को

 अपने को सही मान कर मैंने
शायद न कोई गलती थी की

पर गलत उनके साथ किया
 हा वो मेरी बदसलूकी ही थी

जो कहना चाहूँ वो कह भी पाउ
ये मुझ को मुश्किल लगता हैं

बेमतलब सा अब मुझको
ये सारा जीवन लगता हैं

हा जो भी कहा वो गर समझो
अपनों को पूरा मान दो

ज्यादा कुछ इसमें लगता ही नहीं
बस माता पिता को सम्मान दो

प्यार से बढ़कर कोई तोहफा
कभी किसी को मिला ही नहीं

संतान से सुख मिल नहीं सकता
माँ बाप को जो कभी दिया ही नही.......... !!!!